राजस्थान की लोकदेवी श्री करणी माता करोड़ों भक्तों की आराध्य देवी हैं। उन्हें माँ दुर्गा का अवतार माना जाता है। बीकानेर जिले के प्रसिद्ध देशनोक करणी माता मंदिर में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। उनका मंदिर अपने ‘काबा’ (चूहों) के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। भक्तों का मानना है कि करणी माता के दर्शन मात्र से ही सारे संकट दूर हो जाते हैं।
माँ करणी की आरती श्रद्धा और भक्ति के साथ करने से जीवन में साहस, सुख, समृद्धि, रक्षा तथा मनोकामनाओं की पूर्ति होने की मान्यता है।
यदि आप करणी माता की संपूर्ण आरती, उसका अर्थ, पूजा विधि और लाभ जानना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए है।
श्री करणी माता आरती (हिंदी) Karni Mata Aarti Lyrics in Hindi
ॐ जय अम्बे करणी, मैया जय अम्बे करणी।
भक्त जनन भय संकट, पल छिन में हरणी। ॐ जय अम्बे…
आदि शक्ति विनाशी, वेदन में वरणी।
अगम अन्न गोचर, विश्वरूप धरणी। ॐ जय अम्बे…
काली तू किरपाली, दुर्गे दुख हरणी।
चंडी तू चिस्तौली, ब्राह्मणी वरणी। ॐ जय अम्बे…
लक्ष्मी तू हिंगलाजा, आवड़ अप हरणी।
दैत्य दलन खवाली, अम्बे अवतरणी। ॐ जय अम्बे…
ग्राम सुवाप सुहाणो, धिन थनवट धरणी।
देवला मां मेहर घर, जनमी जग जननी। ॐ जय अम्बे…
रज दियो रिड़मल ने, कानो खय करणी।
धेन दूधत वणिये को, तासी कर तरणी। ॐ जय अम्बे…
शेखो लाय सिंध सूं, पेथड़े आचरणी।
दशरथ थान दिपायी, सांपू सुख सरणी। ॐ जय अम्बे…
जेतल भूप जिताड़यो, कमरु दल दलणी।
प्राण बचाय बखत के, पार कला हरणी। ॐ जय अम्बे…
परचा गिण नहीं पाऊं, मां अशरण हरणी।
सोहन चरण शरण में, दास अभय करणी। ॐ जय अम्बे…
ॐ जय अम्बे करणी, मैया जय अम्बे करणी।
भक्त जनन भय संकट, पल छिन में हरणी। ॐ जय अम्बे…
॥ जय करणी माता ॥
करणी माता कौन हैं?
करणी माता का जन्म राजस्थान के चारण समाज में हुआ था। उन्हें माँ जगदंबा का स्वरूप माना जाता है। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन धर्म, गौ-सेवा, समाज सेवा और लोककल्याण के लिए समर्पित किया।
उनकी दिव्य शक्तियों और चमत्कारों के कारण आज भी लाखों श्रद्धालु उन्हें साक्षात देवी का रूप मानकर पूजा करते हैं।
देशनोक करणी माता मंदिर का महत्व
देशनोक (बीकानेर, राजस्थान) स्थित करणी माता मंदिर विश्वभर में प्रसिद्ध है।
इस मंदिर की सबसे विशेष बात यहां रहने वाले काबा (पवित्र चूहे) हैं।
मान्यता है कि ये सामान्य चूहे नहीं बल्कि करणी माता के भक्तों के पुनर्जन्म स्वरूप हैं। मंदिर में हजारों काबा स्वतंत्र रूप से घूमते हैं और भक्त उन्हें प्रसाद खिलाते हैं।
यदि किसी श्रद्धालु को सफेद काबा दिखाई दे जाए तो इसे अत्यंत शुभ माना जाता है।
करणी माता आरती का महत्व
प्रतिदिन करणी माता की आरती करने से—
- भय दूर होता है।
- नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।
- परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
- कार्यों में सफलता मिलती है।
- साहस और आत्मविश्वास बढ़ता है।
- देवी की कृपा प्राप्त होती है।
- मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है।
करणी माता की पूजा कैसे करें?
पूजा के लिए आवश्यक सामग्री:
- लाल चुनरी
- सिंदूर
- रोली
- अक्षत
- फूल
- नारियल
- अगरबत्ती
- घी का दीपक
- मिश्री या मिठाई
पूजा विधि
- स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- पूजा स्थान को साफ करें।
- करणी माता की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- दीपक एवं धूप जलाएं।
- पुष्प अर्पित करें।
- करणी माता का ध्यान करें।
- आरती करें।
- प्रसाद वितरित करें।
- अंत में परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
करणी माता आरती करने का सही समय
सबसे उत्तम समय—
- प्रातः ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय के बाद
- संध्या आरती के समय
- नवरात्रि
- शुक्रवार
- अष्टमी
- विशेष मनोकामना के अवसर पर
करणी माता की कृपा प्राप्त करने के उपाय
- प्रतिदिन दीपक जलाएं।
- लाल पुष्प अर्पित करें।
- गौ सेवा करें।
- जरूरतमंदों की सहायता करें।
- सत्य एवं धर्म का पालन करें।
- नवरात्रि में नियमित आरती करें।
करणी माता मंदिर कैसे पहुंचे?
स्थान: देशनोक, जिला बीकानेर, राजस्थान
निकटतम रेलवे स्टेशन:
- देशनोक रेलवे स्टेशन
- बीकानेर जंक्शन
निकटतम एयरपोर्ट:
- बीकानेर
- जोधपुर
करणी माता से जुड़े रोचक तथ्य
- करणी माता को दुर्गा का अवतार माना जाता है।
- देशनोक मंदिर लगभग 600 वर्षों से अधिक पुराना माना जाता है।
- मंदिर में हजारों पवित्र काबा रहते हैं।
- सफेद काबा का दर्शन अत्यंत शुभ माना जाता है।
- नवरात्रि में यहां लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।
करणी माता किस देवी का अवतार हैं?
अधिकांश परंपराओं में करणी माता को माँ दुर्गा का अवतार माना जाता है।
करणी माता का प्रसिद्ध मंदिर कहाँ है?
देशनोक, बीकानेर (राजस्थान) में।
करणी माता को क्या भोग लगाना चाहिए?
मिश्री, नारियल, दूध, मिठाई तथा फल अर्पित किए जा सकते हैं।
करणी माता के मंदिर में चूहों का क्या महत्व है?
उन्हें “काबा” कहा जाता है और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार वे पवित्र माने जाते हैं।
करणी माता की आरती कब करनी चाहिए?
सुबह एवं शाम दोनों समय आरती करना शुभ माना जाता है।




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