Chalisa Sangrah – PrabhuPuja https://prabhupuja.com Sanatan Dharma Gyan Thu, 16 Apr 2026 02:55:42 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.4 https://prabhupuja.com/wp-content/uploads/2026/01/cropped-cropped-prabhupuja_site_icon-removebg-preview-1-32x32.png Chalisa Sangrah – PrabhuPuja https://prabhupuja.com 32 32 214786494 श्री राम चालीसा (Shree Ram Chalisa) – संपूर्ण पाठ, विधि और लाभ https://prabhupuja.com/shree-ram-chalisa-lyrics-benefits/ https://prabhupuja.com/shree-ram-chalisa-lyrics-benefits/#respond Sun, 28 Dec 2025 17:51:35 +0000 https://prabhupuja.com/?p=5278 श्री राम चालीसा (Shree Ram Chalisa) मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की स्तुति में लिखी गई 40 चौपाइयां हैं। इसका पाठ करने से मन को अपार शांति मिलती है और जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। जो भक्त सच्चे मन से नित्य राम चालीसा का पाठ करते हैं, उन पर हनुमान जी और श्री राम दोनों की कृपा बनी रहती है।


श्री राम चालीसा Shri Ram Chalisa Lyrics

॥ दोहा ॥
आदौ राम तपोवनादि गमनं हत्वाह् मृगा काञ्चनं
वैदेही हरणं जटायु मरणं सुग्रीव संभाषणं

बाली निर्दलं समुद्र तरणं लङ्कापुरी दाहनम्
पश्चद्रावनं कुम्भकर्णं हननं एतद्धि रामायणं

॥ चौपाई ॥
श्री रघुबीर भक्त हितकारी ।
सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी ॥

निशि दिन ध्यान धरै जो कोई ।
ता सम भक्त और नहिं होई ॥

ध्यान धरे शिवजी मन माहीं ।
ब्रह्मा इन्द्र पार नहिं पाहीं ॥

जय जय जय रघुनाथ कृपाला ।
सदा करो सन्तन प्रतिपाला ॥

दूत तुम्हार वीर हनुमाना ।
जासु प्रभाव तिहूँ पुर जाना ॥

तुव भुजदण्ड प्रचण्ड कृपाला ।
रावण मारि सुरन प्रतिपाला ॥

तुम अनाथ के नाथ गोसाईं ।
दीनन के हो सदा सहाई ॥

ब्रह्मादिक तव पार न पावैं ।
सदा ईश तुम्हरो यश गावैं ॥

चारिउ वेद भरत हैं साखी ।
तुम भक्तन की लज्जा राखी ॥

गुण गावत शारद मन माहीं ।
सुरपति ताको पार न पाहीं ॥ 10 ॥

नाम तुम्हार लेत जो कोई ।
ता सम धन्य और नहिं होई ॥

राम नाम है अपरम्पारा ।
चारिहु वेदन जाहि पुकारा ॥

गणपति नाम तुम्हारो लीन्हों ।
तिनको प्रथम पूज्य तुम कीन्हों ॥

शेष रटत नित नाम तुम्हारा ।
महि को भार शीश पर धारा ॥

फूल समान रहत सो भारा ।
पावत कोउ न तुम्हरो पारा ॥

भरत नाम तुम्हरो उर धारो ।
तासों कबहुँ न रण में हारो ॥

नाम शत्रुहन हृदय प्रकाशा ।
सुमिरत होत शत्रु कर नाशा ॥

लषन तुम्हारे आज्ञाकारी ।
सदा करत सन्तन रखवारी ॥

ताते रण जीते नहिं कोई ।
युद्ध जुरे यमहूँ किन होई ॥

महा लक्ष्मी धर अवतारा ।
सब विधि करत पाप को छारा ॥ 20 ॥

सीता राम पुनीता गायो ।
भुवनेश्वरी प्रभाव दिखायो ॥

घट सों प्रकट भई सो आई ।
जाको देखत चन्द्र लजाई ॥

सो तुमरे नित पांव पलोटत ।
नवो निद्धि चरणन में लोटत ॥

सिद्धि अठारह मंगल कारी ।
सो तुम पर जावै बलिहारी ॥

औरहु जो अनेक प्रभुताई ।
सो सीतापति तुमहिं बनाई ॥

इच्छा ते कोटिन संसारा ।
रचत न लागत पल की बारा ॥

जो तुम्हरे चरनन चित लावै ।
ताको मुक्ति अवसि हो जावै ॥

सुनहु राम तुम तात हमारे ।
तुमहिं भरत कुल- पूज्य प्रचारे ॥

तुमहिं देव कुल देव हमारे ।
तुम गुरु देव प्राण के प्यारे ॥

जो कुछ हो सो तुमहीं राजा ।
जय जय जय प्रभु राखो लाजा ॥ 30 ॥

रामा आत्मा पोषण हारे ।
जय जय जय दशरथ के प्यारे ॥

जय जय जय प्रभु ज्योति स्वरूपा ।
निगुण ब्रह्म अखण्ड अनूपा ॥

सत्य सत्य जय सत्य- ब्रत स्वामी ।
सत्य सनातन अन्तर्यामी ॥

सत्य भजन तुम्हरो जो गावै ।
सो निश्चय चारों फल पावै ॥

सत्य शपथ गौरीपति कीन्हीं ।
तुमने भक्तहिं सब सिद्धि दीन्हीं ॥

ज्ञान हृदय दो ज्ञान स्वरूपा ।
नमो नमो जय जापति भूपा ॥

धन्य धन्य तुम धन्य प्रतापा ।
नाम तुम्हार हरत संतापा ॥

सत्य शुद्ध देवन मुख गाया ।
बजी दुन्दुभी शंख बजाया ॥

सत्य सत्य तुम सत्य सनातन ।
तुमहीं हो हमरे तन मन धन ॥

याको पाठ करे जो कोई ।
ज्ञान प्रकट ताके उर होई ॥ 40 ॥

आवागमन मिटै तिहि केरा ।
सत्य वचन माने शिव मेरा ॥

और आस मन में जो ल्यावै ।
तुलसी दल अरु फूल चढ़ावै ॥

साग पत्र सो भोग लगावै ।
सो नर सकल सिद्धता पावै ॥

अन्त समय रघुबर पुर जाई ।
जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई ॥

श्री हरि दास कहै अरु गावै ।
सो वैकुण्ठ धाम को पावै ॥

॥ दोहा ॥
सात दिवस जो नेम कर पाठ करे चित लाय ।
हरिदास हरिकृपा से अवसि भक्ति को पाय ॥

राम चालीसा जो पढ़े रामचरण चित लाय ।
जो इच्छा मन में करै सकल सिद्ध हो जाय ॥

।।इतिश्री प्रभु श्रीराम चालीसा समाप्त:।।


श्री राम चालीसा पाठ के लाभ (Benefits)

  1. मानसिक शांति: प्रतिदिन पाठ करने से मानसिक तनाव दूर होता है।
  2. संकटों का नाश: प्रभु श्री राम की कृपा से जीवन के कठिन से कठिन संकट कट जाते हैं।
  3. पारिवारिक सुख: परिवार में क्लेश मिटता है और प्रेम बढ़ता है।
  4. हनुमान जी की कृपा: राम जी के भक्तों की रक्षा स्वयं हनुमान जी करते हैं।

श्री राम चालीसा पाठ करने की विधि (Vidhi)

  • समय: सर्वोत्तम समय प्रातः काल (ब्रह्म मुहूर्त) है, परन्तु संध्या के समय भी पाठ किया जा सकता है।
  • आसन: पूर्व दिशा की ओर मुख करके लाल या पीले आसन पर बैठें।
  • दीप: श्री राम दरबार के चित्र के सामने घी का दीपक जलाएं।
  • प्रसाद: पाठ के बाद गुड़-चने या फल का भोग लगाएं।
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श्री शनि चालीसा (Shri Shani Chalisa) – साढे़ साती और ढैया से मुक्ति के लिए | Full Lyrics & Benefits https://prabhupuja.com/shani-chalisa-lyrics-benefits/ https://prabhupuja.com/shani-chalisa-lyrics-benefits/#respond Mon, 22 Dec 2025 12:18:01 +0000 https://prabhupuja.com/?p=5266 भगवान शनि देव (Lord Shani) न्याय के देवता हैं। वे मनुष्य को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। ऐसी मान्यता है कि जिन लोगों पर शनि की ‘साढे़ साती’ (Sade Sati) या ‘ढैया’ चल रही हो, उन्हें शनिवार के दिन श्री शनि चालीसा का पाठ अवश्य करना चाहिए। इससे शनि देव शांत होते हैं और जीवन के कष्ट कम हो जाते हैं।

श्री शनि चालीसा Shri Shani Chalisa Lyrics

॥ दोहा ॥

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल ।
दीनन के दुःख दूर करि , कीजै नाथ निहाल ॥1॥
जय जय श्री शनिदेव प्रभु , सुनहु विनय महाराज ।
करहु कृपा हे रवि तनय , राखहु जन की लाज ॥2॥

।। चौपाई ।।

जयति जयति शनिदेव दयाला । करत सदा भक्तन प्रतिपाला ॥
चारि भुजा, तनु श्याम विराजै । माथे रतन मुकुट छवि छाजै ॥

परम विशाल मनोहर भाला । टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला ॥
कुण्डल श्रवन चमाचम चमके । हिये माल मुक्तन मणि दमकै ॥

कर में गदा त्रिशूल कुठारा । पल बिच करैं अरिहिं संहारा ॥
पिंगल, कृष्णो, छाया, नन्दन । यम, कोणस्थ, रौद्र, दुःख भंजन ॥

सौरी, मन्द शनी दश नामा । भानु पुत्र पूजहिं सब कामा ॥
जापर प्रभु प्रसन्न हवैं जाहीं । रंकहुं राव करैं क्षण माहीं ॥

पर्वतहू तृण होइ निहारत । तृणहू को पर्वत करि डारत ॥
राज मिलत वन रामहिं दीन्हयो । कैकेइहुँ की मति हरि लीन्हयो ॥

वनहुं में मृग कपट दिखाई । मातु जानकी गई चुराई ॥
लषणहिं शक्ति विकल करिडारा । मचिगा दल में हाहाकारा ॥

रावण की गति-मति बौराई । रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई ॥
दियो कीट करि कंचन लंका । बजि बजरंग बीर की डंका ॥

नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा । चित्र मयूर निगलि गै हारा ॥
हार नौलखा लाग्यो चोरी । हाथ पैर डरवायो तोरी ॥

भारी दशा निकृष्ट दिखायो । तेलहिं घर कोल्हू चलवायो ॥
विनय राग दीपक महँ कीन्हयों । तब प्रसन्न प्रभु ह्वै सुख दीन्हयों ॥

हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी । आपहुं भरे डोम घर पानी ॥
तैसे नल पर दशा सिरानी । भूंजी-मीन कूद गई पानी ॥

श्री शंकरहिं गह्यो जब जाई । पारवती को सती कराई ॥
तनिक विकलोकत ही करि रीसा । नभ उड़ि गतो गौरिसुत सीसा ॥

पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी । बची द्रोपदी होति उधारी ॥
कौरव के भी गति मति मारयो । युद्ध महाभारत करि डारयो ॥

रवि कहँ मुख महँ धरि तत्काला । लेकर कूदि परयो पाताला ॥
शेष देव-लखि विनती लाई । रवि को मुख ते दियो छुड़ाई ॥

वाहन प्रभु के सात सुजाना । जग दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना ॥
जम्बुक सिह आदि नख धारी । सो फल ज्योतिष कहत पुकारी ॥

गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं । हय ते सुख सम्पत्ति उपजावै ॥
गर्दभ हानि करै बहु काजा । सिह सिद्ध्कर राज समाजा ॥

जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै । मृग दे कष्ट प्राण संहारै ॥
जब आवहिं स्वान सवारी । चोरी आदि होय डर भारी ॥

तैसहि चारि चरण यह नामा । स्वर्ण लौह चाँदी अरु तामा ॥
लौह चरण पर जब प्रभु आवैं । धन जन सम्पत्ति नष्ट करावैं ॥

समता ताम्र रजत शुभकारी । स्वर्ण सर्वसुख मंगल भारी ॥
जो यह शनि चरित्र नित गावै । कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै ॥

अद्भुत नाथ दिखावैं लीला । करैं शत्रु के नशि बलि ढीला ॥
जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई । विधिवत शनि ग्रह शांति कराई ॥

पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत । दीप दान दै बहु सुख पावत ॥
कहत राम सुन्दर प्रभु दासा । शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा ॥

॥ दोहा ॥

पाठ शनिश्चर देव को, की हों ‘भक्त’ तैयार ।
करत पाठ चालीस दिन, हो भवसागर पार ॥

॥इति श्री शनि चालीसा॥

शनि चालीसा पाठ के लाभ (Benefits)

  1. साढे़ साती और ढैया से राहत: जिन लोगों की कुंडली में शनि भारी है, उन्हें इस पाठ से मानसिक शांति और कष्टों से मुक्ति मिलती है।
  2. दुर्घटना से बचाव: शनि देव की कृपा से आकस्मिक दुर्घटनाओं और अकाल मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है।
  3. कोर्ट-कचहरी में विजय: शनि न्याय के देवता हैं, इसलिए कानूनी मामलों में फंसे लोगों को यह पाठ अवश्य करना चाहिए।
  4. नौकरी और व्यापार: यदि कार्यक्षेत्र में बाधाएं आ रही हों, तो शनिवार को यह पाठ करने से उन्नति होती है।

पूजा विधि (How to perform Puja)

  • समय: शनिवार की शाम (सूर्यास्त के बाद)।
  • स्थान: घर का पूजा स्थल या पीपल का पेड़।
  • सामग्री: सरसों का तेल (Mustard Oil), काले तिल, काला कपड़ा और नीले फूल।
  • विशेष: पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करें।

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

शनि चालीसा का पाठ कब करना चाहिए?

शनिवार की शाम को सूर्यास्त के बाद पाठ करना सबसे उत्तम माना जाता है।

क्या घर के मंदिर में शनि देव की पूजा कर सकते हैं?

शनि देव की मूर्ति घर में नहीं रखनी चाहिए। आप घर में उनका मानसिक ध्यान करके या उनकी तस्वीर के सामने (आंखों में आंखें डाले बिना) पाठ कर सकते हैं, या मंदिर जाकर दीपक जलाएं।

शनि देव को खुश करने के लिए क्या दान करें?

काली उड़द, लोहा, काला कपड़ा, सरसों का तेल और जूते-चप्पल का दान करना बहुत शुभ होता है।

क्या महिलाएं शनि चालीसा पढ़ सकती हैं?

जी हाँ, महिलाएं भी शनि चालीसा का पाठ कर सकती हैं, लेकिन शनि देव की मूर्ति को स्पर्श नहीं करना चाहिए।

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श्री लक्ष्मी चालीसा (Shri Laxmi Chalisa) – सुख, समृद्धि और धन प्राप्ति के लिए | Full Lyrics & Benefits https://prabhupuja.com/laxmi-chalisa-lyrics-benefits/ https://prabhupuja.com/laxmi-chalisa-lyrics-benefits/#respond Mon, 22 Dec 2025 09:16:34 +0000 https://prabhupuja.com/?p=5260 श्री लक्ष्मी चालीसा (Shri Laxmi Chalisa) – सुख, समृद्धि और धन प्राप्ति के लिए | Full Lyrics & Benefits, माँ लक्ष्मी धन, वैभव और सुख-समृद्धि की देवी हैं। ऐसी मान्यता है कि जो भक्त शुक्रवार (Friday) के दिन या दीपावली (Diwali) पर सच्चे मन से ‘श्री लक्ष्मी चालीसा’ का पाठ करते हैं, उनके घर में कभी भी धन की कमी नहीं होती। माँ लक्ष्मी की कृपा से जीवन में स्थिरता और खुशहाली आती है।

श्री लक्ष्मी चालीसा Shri Laxmi Chalisa Lyrics

।। दोहा ।।
मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास।
मनोकामना सिद्घ करि, परुवहु मेरी आस॥

।। सोरठा ।।
यही मोर अरदास, हाथ जोड़ विनती करुं।
सब विधि करौ सुवास, जय जननि जगदंबिका॥

।। चौपाई ।।
सिन्धु सुता मैं सुमिरौ तोही। ज्ञान बुद्घि विघा दो मोही॥


तुम समान नहिं कोई उपकारी। सब विधि पुरवहु आस हमारी॥
जय जय जगत जननि जगदम्बा । सबकी तुम ही हो अवलम्बा॥
तुम ही हो सब घट घट वासी। विनती यही हमारी खासी॥
जगजननी जय सिन्धु कुमारी। दीनन की तुम हो हितकारी॥

विनवौं नित्य तुमहिं महारानी। कृपा करौ जग जननि भवानी॥
केहि विधि स्तुति करौं तिहारी। सुधि लीजै अपराध बिसारी॥
कृपा दृष्टि चितववो मम ओरी। जगजननी विनती सुन मोरी॥
ज्ञान बुद्घि जय सुख की दाता। संकट हरो हमारी माता॥

क्षीरसिन्धु जब विष्णु मथायो। चौदह रत्न सिन्धु में पायो॥
चौदह रत्न में तुम सुखरासी। सेवा कियो प्रभु बनि दासी॥
जब जब जन्म जहां प्रभु लीन्हा। रुप बदल तहं सेवा कीन्हा॥
स्वयं विष्णु जब नर तनु धारा। लीन्हेउ अवधपुरी अवतारा॥

तब तुम प्रगट जनकपुर माहीं। सेवा कियो हृदय पुलकाहीं॥
अपनाया तोहि अन्तर्यामी। विश्व विदित त्रिभुवन की स्वामी॥
तुम सम प्रबल शक्ति नहीं आनी। कहं लौ महिमा कहौं बखानी॥
मन क्रम वचन करै सेवकाई। मन इच्छित वांछित फल पाई॥

तजि छल कपट और चतुराई। पूजहिं विविध भांति मनलाई॥
और हाल मैं कहौं बुझाई। जो यह पाठ करै मन लाई॥
ताको कोई कष्ट नोई। मन इच्छित पावै फल सोई॥
त्राहि त्राहि जय दुःख निवारिणि। त्रिविध ताप भव बंधन हारिणी॥

जो चालीसा पढ़ै पढ़ावै। ध्यान लगाकर सुनै सुनावै॥
ताकौ कोई न रोग सतावै। पुत्र आदि धन सम्पत्ति पावै॥
पुत्रहीन अरु संपति हीना। अन्ध बधिर कोढ़ी अति दीना॥
विप्र बोलाय कै पाठ करावै। शंका दिल में कभी न लावै॥

पाठ करावै दिन चालीसा। ता पर कृपा करैं गौरीसा॥
सुख सम्पत्ति बहुत सी पावै। कमी नहीं काहू की आवै॥
बारह मास करै जो पूजा। तेहि सम धन्य और नहिं दूजा॥
प्रतिदिन पाठ करै मन माही। उन सम कोइ जग में कहुं नाहीं॥

बहुविधि क्या मैं करौं बड़ाई। लेय परीक्षा ध्यान लगाई॥
करि विश्वास करै व्रत नेमा। होय सिद्घ उपजै उर प्रेमा॥
जय जय जय लक्ष्मी भवानी। सब में व्यापित हो गुण खानी॥
तुम्हरो तेज प्रबल जग माहीं। तुम सम कोउ दयालु कहुं नाहिं॥

मोहि अनाथ की सुधि अब लीजै। संकट काटि भक्ति मोहि दीजै॥
भूल चूक करि क्षमा हमारी। दर्शन दजै दशा निहारी॥
बिन दर्शन व्याकुल अधिकारी। तुमहि अछत दुःख सहते भारी॥
नहिं मोहिं ज्ञान बुद्घि है तन में। सब जानत हो अपने मन में॥
रूप चतुर्भुज करके धारण। कष्ट मोर अब करहु निवारण॥
केहि प्रकार मैं करौं बड़ाई। ज्ञान बुद्घि मोहि नहिं अधिकाई॥

॥ दोहा॥
त्राहि त्राहि दुख हारिणी, हरो वेगि सब त्रास। जयति जयति जय लक्ष्मी, करो शत्रु को नाश॥
रामदास धरि ध्यान नित, विनय करत कर जोर। मातु लक्ष्मी दास पर, करहु दया की कोर॥

लक्ष्मी चालीसा पाठ के लाभ (Benefits)

  1. धन की वर्षा: माँ लक्ष्मी चंचला हैं, लेकिन चालीसा के नियमित पाठ से घर में लक्ष्मी का ‘स्थायी वास’ होता है।
  2. दरिद्रता का नाश: आर्थिक तंगी और कर्ज से मुक्ति पाने के लिए यह पाठ अचूक माना गया है।
  3. व्यवसाय में वृद्धि: अगर किसी का व्यापार मंदा चल रहा हो, तो शुक्रवार को दुकान या ऑफिस में पाठ करने से लाभ होता है।
  4. मानसिक शांति: इससे घर के क्लेश दूर होते हैं और परिवार में प्रेम बढ़ता है।

पूजा विधि (How to perform Puja)

  • दिन: शुक्रवार (Friday) या पूर्णिमा।
  • वस्त्र: स्नान करके लाल या गुलाबी वस्त्र धारण करें।
  • सामग्री: माँ लक्ष्मी की मूर्ति या फोटो के सामने घी का दीपक जलाएं। कमल का फूल और बताशे (या खीर) का भोग लगाएं।
  • प्रक्रिया: पहले श्री गणेश जी का ध्यान करें, फिर ‘श्री लक्ष्मी चालीसा’ का पाठ करें और अंत में माँ लक्ष्मी की आरती गाएं।

FAQ

लक्ष्मी चालीसा का पाठ किस दिन करना सबसे शुभ माना जाता है?

वैसे तो आप प्रतिदिन लक्ष्मी चालीसा का पाठ कर सकते हैं, लेकिन शुक्रवार (Friday) का दिन माँ लक्ष्मी को समर्पित होता है। इसलिए, हर शुक्रवार को और विशेष रूप से दीपावली या पूर्णिमा की रात को इसका पाठ करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

मनोकामना पूर्ति के लिए लक्ष्मी चालीसा का पाठ कितनी बार करना चाहिए?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति किसी विशेष मनोकामना (जैसे कर्ज मुक्ति या धन लाभ) के लिए पाठ कर रहा है, तो उसे 40 दिनों तक लगातार सूर्योदय के बाद या सूर्यास्त के समय शुद्ध मन से चालीसा का पाठ करना चाहिए।

क्या लक्ष्मी चालीसा पढ़ने से आर्थिक तंगी दूर होती है?

जी हाँ, श्री लक्ष्मी चालीसा के नियमित पाठ से घर से दरिद्रता दूर होती है और धन-धान्य में वृद्धि होती है। ऐसा माना जाता है कि जिस घर में रोज इसका पाठ होता है, वहां माँ लक्ष्मी का स्थायी वास हो जाता है।

लक्ष्मी चालीसा के पाठ के समय माता को क्या भोग लगाना चाहिए?

माँ लक्ष्मी को सफेद और गुलाबी चीजें अति प्रिय हैं। पाठ करते समय आप खीर (Kheer), बताशे, या दूध से बनी मिठाई का भोग लगा सकते हैं। इसके अलावा, कमल का फूल अर्पित करना भी बहुत शुभ माना जाता है।

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श्री शिव चालीसा (Shri Shiv Chalisa) – पाठ, लाभ और महत्व | Complete Lyrics & Benefits https://prabhupuja.com/shiv-chalisa-lyrics-benefits/ https://prabhupuja.com/shiv-chalisa-lyrics-benefits/#respond Sun, 21 Dec 2025 10:26:10 +0000 https://prabhupuja.com/?p=5253 श्री शिव चालीसा (Shri Shiv Chalisa) – पाठ, लाभ और महत्व | Complete Lyrics & Benefits, भगवान शिव (Lord Shiva) भोलेनाथ हैं, जो अपने भक्तों की पुकार बहुत जल्द सुनते हैं। ‘शिव चालीसा’ भगवान शंकर की स्तुति में रचित 40 चौपाइयां हैं। ऐसा माना जाता है कि सावन के महीने में, सोमवार को या महाशिवरात्रि के दिन शिव चालीसा का पाठ करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और मनचाहा वरदान प्राप्त होता है।

श्री शिव चालीसा Shri Shiv Chalisa Lyrics

॥ दोहा ॥
जय गणेश गिरिजा सुवन,
मंगल मूल सुजान ।
कहत अयोध्यादास तुम,
देहु अभय वरदान ॥

॥ चौपाई ॥
जय गिरिजा पति दीन दयाला ।
सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥

भाल चन्द्रमा सोहत नीके ।
कानन कुण्डल नागफनी के ॥

अंग गौर शिर गंग बहाये ।
मुण्डमाल तन क्षार लगाए ॥

वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे ।
छवि को देखि नाग मन मोहे ॥

मैना मातु की हवे दुलारी ।
बाम अंग सोहत छवि न्यारी ॥

कर त्रिशूल सोहत छवि भारी ।
करत सदा शत्रुन क्षयकारी ॥

नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे ।
सागर मध्य कमल हैं जैसे ॥

कार्तिक श्याम और गणराऊ ।
या छवि को कहि जात न काऊ ॥

देवन जबहीं जाय पुकारा ।
तब ही दुख प्रभु आप निवारा ॥

किया उपद्रव तारक भारी ।
देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी ॥

तुरत षडानन आप पठायउ ।
लवनिमेष महँ मारि गिरायउ ॥

आप जलंधर असुर संहारा ।
सुयश तुम्हार विदित संसारा ॥

त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई ।
सबहिं कृपा कर लीन बचाई ॥

किया तपहिं भागीरथ भारी ।
पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी ॥

दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं ।
सेवक स्तुति करत सदाहीं ॥

वेद नाम महिमा तव गाई।
अकथ अनादि भेद नहिं पाई ॥

प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला ।
जरत सुरासुर भए विहाला ॥

कीन्ही दया तहं करी सहाई ।
नीलकण्ठ तब नाम कहाई ॥

पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा ।
जीत के लंक विभीषण दीन्हा ॥

सहस कमल में हो रहे धारी ।
कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी ॥

एक कमल प्रभु राखेउ जोई ।
कमल नयन पूजन चहं सोई ॥

कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर ।
भए प्रसन्न दिए इच्छित वर ॥

जय जय जय अनन्त अविनाशी ।
करत कृपा सब के घटवासी ॥

दुष्ट सकल नित मोहि सतावै ।
भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै ॥

त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो ।
येहि अवसर मोहि आन उबारो ॥

लै त्रिशूल शत्रुन को मारो ।
संकट से मोहि आन उबारो ॥

मात-पिता भ्राता सब होई ।
संकट में पूछत नहिं कोई ॥

स्वामी एक है आस तुम्हारी ।
आय हरहु मम संकट भारी ॥

धन निर्धन को देत सदा हीं ।
जो कोई जांचे सो फल पाहीं ॥

अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी ।
क्षमहु नाथ अब चूक हमारी ॥

शंकर हो संकट के नाशन ।
मंगल कारण विघ्न विनाशन ॥

योगी यति मुनि ध्यान लगावैं ।
शारद नारद शीश नवावैं ॥

नमो नमो जय नमः शिवाय ।
सुर ब्रह्मादिक पार न पाय ॥

जो यह पाठ करे मन लाई ।
ता पर होत है शम्भु सहाई ॥

ॠनियां जो कोई हो अधिकारी ।
पाठ करे सो पावन हारी ॥

पुत्र हीन कर इच्छा जोई ।
निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई ॥

पण्डित त्रयोदशी को लावे ।
ध्यान पूर्वक होम करावे ॥

त्रयोदशी व्रत करै हमेशा ।
ताके तन नहीं रहै कलेशा ॥

धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे ।
शंकर सम्मुख पाठ सुनावे ॥

जन्म जन्म के पाप नसावे ।
अन्त धाम शिवपुर में पावे ॥

कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी ।
जानि सकल दुःख हरहु हमारी ॥

॥ दोहा ॥
नित्त नेम कर प्रातः ही,
पाठ करौं चालीसा ।
तुम मेरी मनोकामना,
पूर्ण करो जगदीश ॥

मगसर छठि हेमन्त ॠतु,
संवत चौसठ जान ।
अस्तुति चालीसा शिवहि,
पूर्ण कीन कल्याण ॥

शिव चालीसा पाठ के लाभ (Benefits of Chanting Shiv Chalisa)

  1. मानसिक शांति (Mental Peace): शिव चालीसा के नियमित पाठ से मन की बेचैनी दूर होती है और शांति मिलती है।
  2. कष्टों से मुक्ति: भगवान शिव ‘संकट मोचन’ भी हैं; वे अपने भक्तों के दुख, दरिद्रता और रोगों का नाश करते हैं।
  3. मनोकामना पूर्ति: कहा जाता है कि 40 दिन तक लगातार श्रद्धापूर्वक पाठ करने से कठिन से कठिन कार्य भी सिद्ध हो जाते हैं।
  4. ग्रह दोष निवारण: कुंडली में अशुभ ग्रहों के प्रभाव को कम करने के लिए भी शिव चालीसा बहुत प्रभावी मानी जाती है।

पूजा विधि (How to Recite)

  • समय: ब्रह्म मुहूर्त या शाम के समय (प्रदोष काल)।
  • आसन: कुशा या ऊनी आसन पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
  • सामग्री: सामने शिव जी की मूर्ति या शिवलिंग रखें, जल का लोटा रखें और दीपक जलाएं।

FAQ

शिव चालीसा का पाठ कितनी बार करना चाहिए?

सामान्यतः एक बार, लेकिन विशेष मनोकामना के लिए 3, 5 या 11 बार पाठ किया जा सकता है।

क्या महिलाएं शिव चालीसा पढ़ सकती हैं?

जी हाँ, महिलाएं भी पूर्ण श्रद्धा के साथ शिव चालीसा का पाठ कर सकती हैं।

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श्री दुर्गा चालीसा (अर्थ सहित) – Shri Durga Chalisa in Hindi https://prabhupuja.com/shri-durga-chalisa-in-hindi/ https://prabhupuja.com/shri-durga-chalisa-in-hindi/#respond Tue, 02 Dec 2025 12:11:08 +0000 https://prabhupuja.com/?p=5246 श्री दुर्गा चालीसा माँ दुर्गा की स्तुति में रचित 40 चौपाइयों का एक अत्यंत शक्तिशाली पाठ है। मान्यता है कि नवरात्रि, मंगलवार या शुक्रवार को इसका पाठ करने से जीवन के सभी संकट, शत्रु और भय दूर हो जाते हैं। माँ दुर्गा शक्ति की देवी हैं और अपने भक्तों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहती हैं।

श्री दुर्गा चालीसा

॥ दोहा ॥

नमो नमो दुर्गे सुख करनी । नमो नमो अम्बे दुःख हरनी ॥ निराकार है ज्योति तुम्हारी । तिहूँ लोक फैली उजियारी ॥

शशि ललाट मुख महाविशाला । नेत्र लाल भृकुटि विकराला ॥ रूप मातु को अधिक सुहावे । दरश करत जन अति सुख पावे ॥

॥ चौपाई ॥

तुम संसार शक्ति लै कीना । पालन हेतु अन्न धन दीना ॥

अन्नपूर्णा हुई जग पाला । तुम ही आदि सुन्दरी बाला ॥

प्रलयकाल सब नाशन हारी । तुम गौरी शिवशंकर प्यारी ॥

शिव योगी तुम्हरे गुण गावें । ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें ॥

रूप सरस्वती को तुम धारा । दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा ॥

धरयो रूप नरसिंह को अम्बा । परगट भई फाड़कर खम्बा ॥

रक्षा करि प्रह्लाद बचायो । हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो ॥

लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं । श्री नारायण अंग समाहीं ॥

क्षीरसिन्धु में करत विलासा । दयासिन्धु दीजै मन आसा ॥

हिंगलाज में तुम्हीं भवानी । महिमा अमित न जात बखानी ॥

मातंगी अरु धूमावति माता । भुवनेश्वरी बगला सुख दाता ॥

श्री भैरव तारा जग तारिणी । छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी ॥

केहरि वाहन सोह भवानी । लांगुर वीर चलत अगवानी ॥

कर में खप्पर खड्ग विराजै । जाको देख काल डर भाजै ॥

सोहै अस्त्र और त्रिशूला । जाते उठत शत्रु हिय शूला ॥

नगरकोट में तुम्हीं विराजत । तिहुँलोक में डंका बाजत ॥

शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे । रक्तबीज शंखन संहारे ॥

महिषासुर नृप अति अभिमानी । जेहि अघ भार मही अकुलानी ॥

रूप कराल कालिका धारा । सेन सहित तुम तिहि संहारा ॥

परी गाढ़ सन्तन पर जब जब । भई सहाय मातु तुम तब तब ॥

अमरपुरी अरु बासव लोका । तब महिमा सब रहें अशोका ॥

ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी । तुम्हें सदा पूजें नर-नारी ॥

प्रेम भक्ति से जो यश गावें । दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें ॥

ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई । जन्म-मरण ताकौ छुटि जाई ॥

जोगी सुर मुनि कहत पुकारी । योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी ॥

शंकर आचारज तप कीनो । काम अरु क्रोध जीति सब लीनो ॥

निशिदिन ध्यान धरो शंकर को । काहु काल नहिं सुमिरो तुमको ॥

शक्ति रूप को मरम न पायो । शक्ति गई तब मन पछतायो ॥

शरणागत हुई कीर्ति बखानी । जय जय जय जगदम्ब भवानी ॥

भई प्रसन्न आदि जगदम्बा । दई शक्ति नहिं कीन बिलम्बा ॥

मोको मातु कष्ट अति घेरो । तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो ॥

आशा तृष्णा निपट सतावें । मोह मदादिक सब बिनशावें ॥

शत्रु नाश कीजै महारानी । सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी ॥

करो कृपा हे मातु दयाला । ऋद्धिसिद्धि दै करहु निहाला ॥

जब लगी जिऊँ दया फल पाऊँ । तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊँ ॥

दुर्गा चालीसा जो नर गावै । सब सुख भोग परमपद पावै ॥

देवीदास शरण निज जानी । करहु कृपा जगदम्ब भवानी ॥

श्री दुर्गा चालीसा (अर्थ सहित)

तुम संसार शक्ति लै कीना । पालन हेतु अन्न धन दीना ॥ अन्नपूर्णा हुई जग पाला । तुम ही आदि सुन्दरी बाला ॥ (अर्थ: आपने ही समस्त संसार की शक्ति को धारण किया हुआ है। पालन-पोषण के लिए आप ही अन्न और धन प्रदान करती हैं। आप ही अन्नपूर्णा बनकर जगत का पालन करती हैं और आप ही आदि सुन्दरी बाला (किशोरी) रूप हैं।)

प्रलयकाल सब नाशन हारी । तुम गौरी शिवशंकर प्यारी ॥ शिव योगी तुम्हरे गुण गावें । ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें ॥ (अर्थ: प्रलय के समय आप ही सब कुछ नष्ट करने वाली हैं। आप भगवान शिव की प्यारी पत्नी गौरी हैं। भगवान शिव और सभी योगी आपका गुणगान करते हैं, और ब्रह्मा-विष्णु भी नित्य आपका ध्यान करते हैं।)

रूप सरस्वती को तुम धारा । दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा ॥ धरयो रूप नरसिंह को अम्बा । परगट भई फाड़कर खम्बा ॥ (अर्थ: आपने ही सरस्वती का रूप धारण कर ऋषियों और मुनियों को सद्बुद्धि देकर उनका उद्धार किया। हे अम्बे! आपने ही नरसिंह अवतार धारण किया और खंभे को फाड़कर प्रकट हुईं।)

रक्षा करि प्रह्लाद बचायो । हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो ॥ लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं । श्री नारायण अंग समाहीं ॥ (अर्थ: आपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा की और हिरण्यकश्यप को मारकर उसे स्वर्ग (मोक्ष) प्रदान किया। आप ही संसार में लक्ष्मी रूप में विराजमान हैं और श्री नारायण (विष्णु) के अंग संग रहती हैं।)

क्षीरसिन्धु में करत विलासा । दयासिन्धु दीजै मन आसा ॥ हिंगलाज में तुम्हीं भवानी । महिमा अमित न जात बखानी ॥ (अर्थ: आप क्षीरसागर में भगवान विष्णु के साथ निवास करती हैं। हे दया की सागर! मेरी मनोकामना पूर्ण करें। हिंगलाज में भवानी के रूप में आप ही विराजमान हैं, आपकी महिमा का वर्णन नहीं किया जा सकता।)

मातंगी अरु धूमावति माता । भुवनेश्वरी बगला सुख दाता ॥ श्री भैरव तारा जग तारिणी । छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी ॥ (अर्थ: आप ही मातंगी, धूमावती, भुवनेश्वरी और सुख देने वाली बगलामुखी माता हैं। आप ही भैरवी, तारा और छिन्नमस्ता देवी हैं जो संसार के दुःखों को दूर करती हैं।)

केहरि वाहन सोह भवानी । लांगुर वीर चलत अगवानी ॥ कर में खप्पर खड्ग विराजै । जाको देख काल डर भाजै ॥ (अर्थ: हे भवानी! आप सिंह (केहरि) की सवारी पर सुशोभित हैं और वीर हनुमान (लांगुर) आपकी अगुवाई करते हैं। आपके हाथों में खप्पर और तलवार है, जिसे देखकर साक्षात काल (मृत्यु) भी डरकर भाग जाता है।)

सोहै अस्त्र और त्रिशूला । जाते उठत शत्रु हिय शूला ॥ नगरकोट में तुम्हीं विराजत । तिहुँलोक में डंका बाजत ॥ (अर्थ: आपके पास अस्त्र और त्रिशूल शोभायमान हैं, जिससे शत्रुओं के हृदय में भय (शूल) उत्पन्न होता है। नगरकोट (कांगड़ा) में आप ही विराजमान हैं और तीनों लोकों में आपकी जय-जयकार (डंका) होती है।)

शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे । रक्तबीज शंखन संहारे ॥ महिषासुर नृप अति अभिमानी । जेहि अघ भार मही अकुलानी ॥ (अर्थ: आपने ही शुम्भ-निशुम्भ और रक्तबीज जैसे राक्षसों का संहार किया। महिषासुर राजा बहुत अहंकारी था, जिसके पापों के भार से धरती व्याकुल हो उठी थी।)

रूप कराल कालिका धारा । सेन सहित तुम तिहि संहारा ॥ परी गाढ़ सन्तन पर जब जब । भई सहाय मातु तुम तब तब ॥ (अर्थ: तब आपने काली का विकराल रूप धारण किया और सेना सहित महिषासुर का नाश किया। जब-जब संतों और भक्तों पर संकट आया, तब-तब हे माता, आप उनकी सहायता के लिए प्रकट हुईं।)

अमरपुरी अरु बासव लोका । तब महिमा सब रहें अशोका ॥ ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी । तुम्हें सदा पूजें नर-नारी ॥ (अर्थ: स्वर्गलोक (अमरपुरी) और अन्य सभी लोक आपकी कृपा से शोक रहित रहते हैं। ज्वाला जी में आपकी ही ज्योति जल रही है, जहाँ नर-नारी सदा आपकी पूजा करते हैं।)

प्रेम भक्ति से जो यश गावें । दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें ॥ ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई । जन्म-मरण ताकौ छुटि जाई ॥ (अर्थ: जो प्रेम और भक्ति से आपका यश गाता है, दुःख और गरीबी उसके पास नहीं भटकती। जो व्यक्ति सच्चे मन से आपका ध्यान करता है, वह जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है।)

जोगी सुर मुनि कहत पुकारी । योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी ॥ शंकर आचारज तप कीनो । काम अरु क्रोध जीति सब लीनो ॥ (अर्थ: योगी, देवता और मुनि पुकार कर कहते हैं कि आपकी शक्ति के बिना योग संभव नहीं है। आदि शंकराचार्य जी ने भी आपकी तपस्या की और काम-क्रोध पर विजय प्राप्त की।)

निशिदिन ध्यान धरो शंकर को । काहु काल नहिं सुमिरो तुमको ॥ शक्ति रूप को मरम न पायो । शक्ति गई तब मन पछतायो ॥ (अर्थ: उन्होंने केवल भगवान शंकर का ध्यान किया और आपका स्मरण नहीं किया। शक्ति के रहस्य को न समझ पाने के कारण जब उनकी शक्ति चली गई, तब वे पछताए।)

शरणागत हुई कीर्ति बखानी । जय जय जय जगदम्ब भवानी ॥ भई प्रसन्न आदि जगदम्बा । दई शक्ति नहिं कीन बिलम्बा ॥ (अर्थ: फिर उन्होंने आपकी शरण ली और आपकी कीर्ति का बखान किया, “जय जय जय जगदम्बा भवानी!” तब आप प्रसन्न हुईं और उन्हें उनकी शक्ति लौटाने में जरा भी देर नहीं की।)

मोको मातु कष्ट अति घेरो । तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो ॥ आशा तृष्णा निपट सतावें । मोह मदादिक सब बिनशावें ॥ (अर्थ: हे माँ! मुझे कष्टों ने चारों ओर से घेर लिया है, आपके बिना मेरे दुःख कौन हरेगा? आशा, तृष्णा और सांसारिक इच्छाएं मुझे सताती हैं; मेरे मोह और अहंकार का नाश कीजिये।)

शत्रु नाश कीजै महारानी । सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी ॥ करो कृपा हे मातु दयाला । ऋद्धिसिद्धि दै करहु निहाला ॥ (अर्थ: हे महारानी! मेरे शत्रुओं (काम, क्रोध, लोभ) का नाश कीजिये, मैं एकाग्र मन से आपका स्मरण करता हूँ। हे दयालु माता! कृपा करें और मुझे ऋद्धि-सिद्धि देकर निहाल (संपन्न) करें।)

जब लगी जिऊँ दया फल पाऊँ । तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊँ ॥ दुर्गा चालीसा जो नर गावै । सब सुख भोग परमपद पावै ॥ (अर्थ: जब तक मैं जीवित रहूँ, आपकी दया प्राप्त करता रहूँ और सदा आपका यश सुनाता रहूँ। जो मनुष्य इस दुर्गा चालीसा को गाता है, वह सभी सुख भोगकर अंत में मोक्ष (परमपद) प्राप्त करता है।)

देवीदास शरण निज जानी । करहु कृपा जगदम्ब भवानी ॥ (अर्थ: देवीदास को अपनी शरण में जानकर, हे जगदम्बा भवानी, उस पर अपनी कृपा कीजिये।)

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श्री दुर्गा चालीसा पाठ के लाभ (Benefits)

  1. शत्रु नाश: शत्रुओं और विरोधियों पर विजय प्राप्त होती है।
  2. मानसिक शांति: मन का भय, चिंता और तनाव दूर होता है।
  3. धन लाभ: माँ लक्ष्मी की कृपा से आर्थिक स्थिति सुधरती है।
  4. ग्रह शांति: राहु-केतु और शनि जैसे ग्रहों के दुष्प्रभाव कम होते हैं।
  5. रक्षा कवच: यह पाठ परिवार के चारों ओर एक सुरक्षा कवच बनाता है।

जय माता दी! 🙏

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Bhairav Chalisa Lyrics in Hindi https://prabhupuja.com/kaal-bhairav-chalisa-in-hindi-lyrics-meaning-chanting-importance-and-benefits/ https://prabhupuja.com/kaal-bhairav-chalisa-in-hindi-lyrics-meaning-chanting-importance-and-benefits/#respond Sun, 03 Dec 2023 11:35:43 +0000 https://prabhupuja.com/?p=1570 Bhairav Chalisa Lyrics in Hindi श्री भैरव चालीसा, भगवान काल भैरव भक्तो के दुःख हर्ता है। कष्टों, व्याधियों और शत्रुओ को परास्त करने वाले है। जो भक्त प्रत्येक रविवार भैरव मंदिर में जाकर भैरव जी के समक्ष सरसो के तेल का दीपक जलाकर भैरव चालीसा का पाठ करता है, उसके जीवन की हर बाधा को भैरव जी हर लेते है। भैरव चालीसा पाठ के बाद भैरव जी की आरती अवश्य करनी चाहिए।

Bhairav Chalisa Lyrics in Hindi भैरव चालीसा सम्पूर्ण हिंदी में

॥ दोहा ॥

श्री गणपति, गुरु गौरि पद, प्रेम सहित धरि माथ । चालीसा वन्दन करों, श्री शिव भैरवनाथ ॥
श्री भैरव संकट हरण, मंगल करण कृपाल । श्याम वरण विकराल वपु, लोचन लाल विशाल ॥

जय जय श्री काली के लाला । जयति जयति काशी-कुतवाला।।
जयति बटुक भैरव जय हारी । जयति काल भैरव बलकारी।।
जयति सर्व भैरव विख्याता । जयति नाथ भैरव सुखदाता।।
भैरव रुप कियो शिव धारण । भव के भार उतारण कारण।।
भैरव रव सुन है भय दूरी । सब विधि होय कामना पूरी ।।
शेष महेश आदि गुण गायो । काशी-कोतवाल कहलायो।।
जटाजूट सिर चन्द्र विराजत । बाला, मुकुट, बिजायठ साजत।।
कटि करधनी घुंघरु बाजत । दर्शन करत सकल भय भाजत।।
जीवन दान दास को दीन्हो । कीन्हो कृपा नाथ तब चीन्हो।।

वसि रसना बनि सारद-काली । दीन्यो वर राख्यो मम लाली।।
धन्य धन्य भैरव भय भंजन । जय मनरंजन खल दल भंजन।।
कर त्रिशूल डमरु शुचि कोड़ा । कृपा कटाक्ष सुयश नहिं थोड़ा।।
जो भैरव निर्भय गुण गावत । अष्टसिद्घि नवनिधि फल पावत।।
रुप विशाल कठिन दुख मोचन । क्रोध कराल लाल दुहुं लोचन।।
अगणित भूत प्रेत संग डोलत । बं बं बं शिव बं बं बोतल।।
रुद्रकाय काली के लाला । महा कालहू के हो काला।।
बटुक नाथ हो काल गंभीरा । श्वेत, रक्त अरु श्याम शरीरा।।
करत तीनहू रुप प्रकाशा । भरत सुभक्तन कहं शुभ आशा।।

रत्न जड़ित कंचन सिंहासन । व्याघ्र चर्म शुचि नर्म सुआनन।।
तुमहि जाई काशिहिं जन ध्यावहिं । विश्वनाथ कहं दर्शन पावहिं।।
जय प्रभु संहारक सुनन्द जय । जय उन्नत हर उमानन्द जय।।
भीम त्रिलोकन स्वान साथ जय । बैजनाथ श्री जगतनाथ जय।।
महाभीम भीषण शरीर जय । रुद्र त्र्यम्बक धीर वीर जय ।।
अश्वनाथ जय प्रेतनाथ जय । श्वानारुढ़ सयचन्द्र नाथ जय।
निमिष दिगम्बर चक्रनाथ जय । गहत अनाथन नाथ हाथ जय ।।
त्रेशलेश भूतेश चन्द्र जय । क्रोध वत्स अमरेश नन्द जय ।।
श्री वामन नकुलेश चण्ड जय । कृत्याऊ कीरति प्रचण्ड जय ।।

रुद्र बटुक क्रोधेश काल धर । चक्र तुण्ड दश पाणिव्याल धर ।।
करि मद पान शम्भु गुणगावत । चैंसठ योगिन संग नचावत ।।
करत कृपा जन पर बहु ढंगा । काशी कोतवाल अड़बंगा ।।
देयं काल भैरव जब सोटा । नसै पाप मोटा से मोटा ।।
जाकर निर्मल होय शरीरा। मिटै सकल संकट भव पीरा।।
श्री भैरव भूतों के राजा । बाधा हरत करत शुभ काजा।।
ऐलादी के दुःख निवारयो । सदा कृपा करि काज सम्हारयो। ।
सुन्दरदास सहित अनुरागा । श्री दुर्वासा निकट प्रयागा ।।
श्री भैरव जी की जय लेख्यो । सकल कामना पूरण देख्यो।।

॥ दोहा ॥

जय जय जय भैरव बटुक, स्वामी संकट टार । कृपा दास पर कीजिये, शंकर के अवतार ॥
जो यह चालीसा पढ़े, प्रेम सहित सत बार । उस घर सर्वानन्द हों, वैभव बड़े अपार ॥

|| इति श्री भैरव चालीसा समाप्त ||

Bhairav Chalisa meaning chanting importance and benefits भैरव चालीसा का अर्थ, महत्व एवं लाभ

भैरव चालीसा पाठ से कुंडली में शत्रु भाव का अंत होता है। जातक(जिसके लिये पाठ किया जा रहा हो) पर की गई हर तांत्रिक विद्या का नाश भगवान काल भैरव पल भर में कर देते है।

FAQ

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Ganesh Chalisa Lyrics in Hindi श्री गणेश चालीसा https://prabhupuja.com/ganesh-chalisa-lyrics-in-hindi/ https://prabhupuja.com/ganesh-chalisa-lyrics-in-hindi/#respond Sun, 19 Nov 2023 17:44:57 +0000 https://prabhupuja.com/?p=1497 Ganesh Chalisa Lyrics in Hindi श्री गणेश चालीसा हर बुधवार को करें गणेश चालीसा का पाठ, बनी रहेगी सुख-समृद्धि और मिलेगा शुभ फल

Ganesh Chalisa Lyrics in Hindi

दोहा
जय गणपति सदगुणसदन, कविवर बदन कृपाल।
विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल॥

चौपाई
जय जय जय गणपति गणराजू।
मंगल भरण करण शुभ काजू॥
जय गजबदन सदन सुखदाता।
विश्व विनायक बुद्घि विधाता॥
वक्र तुण्ड शुचि शुण्ड सुहावन।
तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन॥
राजत मणि मुक्तन उर माला।
स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला॥
पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं।
मोदक भोग सुगन्धित फूलं॥
सुन्दर पीताम्बर तन साजित।
चरण पादुका मुनि मन राजित॥
धनि शिवसुवन षडानन भ्राता।
गौरी ललन विश्व-विख्याता॥
ऋद्धि-सिद्धि तव चंवर सुधारे।
मूषक वाहन सोहत द्घारे॥
कहौ जन्म शुभ-कथा तुम्हारी।
अति शुचि पावन मंगलकारी॥
एक समय गिरिराज कुमारी।
पुत्र हेतु तप कीन्हो भारी॥

भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा।
तब पहुंच्यो तुम धरि द्घिज रुपा॥
अतिथि जानि कै गौरि सुखारी।
बहुविधि सेवा करी तुम्हारी॥
अति प्रसन्न है तुम वर दीन्हा।
मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा॥
मिलहि पुत्र तुहि, बुद्धि विशाला।
बिना गर्भ धारण, यहि काला॥
गणनायक, गुण ज्ञान निधाना।
पूजित प्रथम, रुप भगवाना॥
अस कहि अन्तर्धान रुप है।
पलना पर बालक स्वरुप है॥
बनि शिशु, रुदन जबहिं तुम ठाना।
लखि मुख सुख नहिं गौरि समाना॥
सकल मगन, सुखमंगल गावहिं।
नभ ते सुरन, सुमन वर्षावहिं॥
शम्भु, उमा, बहु दान लुटावहिं।
सुर मुनिजन, सुत देखन आवहिं॥
लखि अति आनन्द मंगल साजा।
देखन भी आये शनि राजा॥

निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं।
बालक, देखन चाहत नाहीं॥
गिरिजा कछु मन भेद बढ़ायो।
उत्सव मोर, न शनि तुहि भायो॥
कहन लगे शनि, मन सकुचाई।
का करिहौ, शिशु मोहि दिखाई॥
नहिं विश्वास, उमा उर भयऊ।
शनि सों बालक देखन कहाऊ॥
पडतहिं, शनि दृग कोण प्रकाशा।
बोलक सिर उड़ि गयो अकाशा॥
गिरिजा गिरीं विकल हुए धरणी।
सो दुख दशा गयो नहीं वरणी॥
हाहाकार मच्यो कैलाशा।
शनि कीन्हो लखि सुत को नाशा॥
तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो।
काटि चक्र सो गज शिर लाये॥
बालक के धड़ ऊपर धारयो।
प्राण, मंत्र पढ़ि शंकर डारयो॥
नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे।
प्रथम पूज्य बुद्धि निधि, वन दीन्हे॥

बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा।
पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा॥
चले षडानन, भरमि भुलाई।
रचे बैठ तुम बुद्घि उपाई॥
धनि गणेश कहि शिव हिय हरषे।
नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे॥
चरण मातु-पितु के धर लीन्हें।
तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें॥
तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई।
शेष सहसमुख सके न गाई॥
मैं मतिहीन मलीन दुखारी।
करहुं कौन विधि विनय तुम्हारी॥
भजत रामसुन्दर प्रभुदासा।
जग प्रयाग, ककरा, दुर्वासा॥
अब प्रभु दया दीन पर कीजै।
अपनी भक्ति शक्ति कछु दीजै॥
श्री गणेश यह चालीसा।
पाठ करै कर ध्यान॥
नित नव मंगल गृह बसै।
लहे जगत सन्मान॥

दोहा
सम्वत अपन सहस्त्र दश, ऋषि पंचमी दिनेश।
पूरण चालीसा भयो, मंगल मूर्ति गणेश॥

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Hanuman Chalisa Lyrics in Hindi हनुमान चालीसा पाठ https://prabhupuja.com/hanuman-chalisa-lyrics-in-hindi/ https://prabhupuja.com/hanuman-chalisa-lyrics-in-hindi/#respond Wed, 15 Nov 2023 07:34:21 +0000 https://prabhupuja.com/?p=1455 Hanuman Chalisa Lyrics in Hindi हनुमान चालीसा तुलसीदास जी द्वारा रचित महान रचना हैं। तुलसीदास जी बहुत बड़े राम भक्त थे। साथ ही वो हनुमान भक्त भी थे। क्योकि राम भक्ति हनुमान बिना अधूरी हैं। मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ जरूर करना चाहिये। हनुमान चालीसा का रोज सुबह पाठ हर दुःख का नाश करता हैं। हनुमान जी की पूजा से शिव जी की कृपा भी प्राप्त होती हैं। क्योकि हनुमान जी रूद्र अवतार भी हैं। सभी सुखो का वास हैं हनुमान चालीसा में, तो रोज सुबह स्न्नान करके हनुमान जी के समक्ष तेल का दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें।

Hanuman Chalisa Lyrics in Hindi हनुमान चालीसा

दोहा
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निजमन मुकुरु सुधारि। बरनउं रघुबर बिमल जसु, जो दायक फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।

चौपाई
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।
राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।
महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी।।
कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुण्डल कुँचित केसा।।
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजे। कांधे मूंज जनेउ साजे।।
शंकर सुवन केसरी नंदन। तेज प्रताप महा जग वंदन।।
बिद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर।।

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया।।
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा।।
भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचन्द्र के काज संवारे।।
लाय सजीवन लखन जियाये। श्री रघुबीर हरषि उर लाये।।
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं।।
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा।।
जम कुबेर दिगपाल जहां ते। कबि कोबिद कहि सके कहां ते।।
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा।।
तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना। लंकेश्वर भए सब जग जाना।।
जुग सहस्र जोजन पर भानु। लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।

दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।
राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।
सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रच्छक काहू को डर ना।।
आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हांक तें कांपै।।
भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै।।
नासै रोग हरे सब पीरा। जपत निरन्तर हनुमत बीरा।।
संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।

सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा।।
और मनोरथ जो कोई लावै। सोई अमित जीवन फल पावै।।
चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा।।
साधु संत के तुम रखवारे।। असुर निकन्दन राम दुलारे।।
अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता।।
राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा।।
तुह्मरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै।।

अंत काल रघुबर पुर जाई। जहां जन्म हरिभक्त कहाई।।
और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।।
सङ्कट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।
जय जय जय हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।
जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बन्दि महा सुख होई।।
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा।।
तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महं डेरा।।

दोहा
पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।

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