भगवान शनि देव (Lord Shani) न्याय के देवता हैं। वे मनुष्य को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। ऐसी मान्यता है कि जिन लोगों पर शनि की ‘साढे़ साती’ (Sade Sati) या ‘ढैया’ चल रही हो, उन्हें शनिवार के दिन श्री शनि चालीसा का पाठ अवश्य करना चाहिए। इससे शनि देव शांत होते हैं और जीवन के कष्ट कम हो जाते हैं।
श्री शनि चालीसा Shri Shani Chalisa Lyrics
॥ दोहा ॥
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल ।
दीनन के दुःख दूर करि , कीजै नाथ निहाल ॥1॥
जय जय श्री शनिदेव प्रभु , सुनहु विनय महाराज ।
करहु कृपा हे रवि तनय , राखहु जन की लाज ॥2॥
।। चौपाई ।।
जयति जयति शनिदेव दयाला । करत सदा भक्तन प्रतिपाला ॥
चारि भुजा, तनु श्याम विराजै । माथे रतन मुकुट छवि छाजै ॥
परम विशाल मनोहर भाला । टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला ॥
कुण्डल श्रवन चमाचम चमके । हिये माल मुक्तन मणि दमकै ॥
कर में गदा त्रिशूल कुठारा । पल बिच करैं अरिहिं संहारा ॥
पिंगल, कृष्णो, छाया, नन्दन । यम, कोणस्थ, रौद्र, दुःख भंजन ॥
सौरी, मन्द शनी दश नामा । भानु पुत्र पूजहिं सब कामा ॥
जापर प्रभु प्रसन्न हवैं जाहीं । रंकहुं राव करैं क्षण माहीं ॥
पर्वतहू तृण होइ निहारत । तृणहू को पर्वत करि डारत ॥
राज मिलत वन रामहिं दीन्हयो । कैकेइहुँ की मति हरि लीन्हयो ॥
वनहुं में मृग कपट दिखाई । मातु जानकी गई चुराई ॥
लषणहिं शक्ति विकल करिडारा । मचिगा दल में हाहाकारा ॥
रावण की गति-मति बौराई । रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई ॥
दियो कीट करि कंचन लंका । बजि बजरंग बीर की डंका ॥
नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा । चित्र मयूर निगलि गै हारा ॥
हार नौलखा लाग्यो चोरी । हाथ पैर डरवायो तोरी ॥
भारी दशा निकृष्ट दिखायो । तेलहिं घर कोल्हू चलवायो ॥
विनय राग दीपक महँ कीन्हयों । तब प्रसन्न प्रभु ह्वै सुख दीन्हयों ॥
हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी । आपहुं भरे डोम घर पानी ॥
तैसे नल पर दशा सिरानी । भूंजी-मीन कूद गई पानी ॥
श्री शंकरहिं गह्यो जब जाई । पारवती को सती कराई ॥
तनिक विकलोकत ही करि रीसा । नभ उड़ि गतो गौरिसुत सीसा ॥
पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी । बची द्रोपदी होति उधारी ॥
कौरव के भी गति मति मारयो । युद्ध महाभारत करि डारयो ॥
रवि कहँ मुख महँ धरि तत्काला । लेकर कूदि परयो पाताला ॥
शेष देव-लखि विनती लाई । रवि को मुख ते दियो छुड़ाई ॥
वाहन प्रभु के सात सुजाना । जग दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना ॥
जम्बुक सिह आदि नख धारी । सो फल ज्योतिष कहत पुकारी ॥
गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं । हय ते सुख सम्पत्ति उपजावै ॥
गर्दभ हानि करै बहु काजा । सिह सिद्ध्कर राज समाजा ॥
जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै । मृग दे कष्ट प्राण संहारै ॥
जब आवहिं स्वान सवारी । चोरी आदि होय डर भारी ॥
तैसहि चारि चरण यह नामा । स्वर्ण लौह चाँदी अरु तामा ॥
लौह चरण पर जब प्रभु आवैं । धन जन सम्पत्ति नष्ट करावैं ॥
समता ताम्र रजत शुभकारी । स्वर्ण सर्वसुख मंगल भारी ॥
जो यह शनि चरित्र नित गावै । कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै ॥
अद्भुत नाथ दिखावैं लीला । करैं शत्रु के नशि बलि ढीला ॥
जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई । विधिवत शनि ग्रह शांति कराई ॥
पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत । दीप दान दै बहु सुख पावत ॥
कहत राम सुन्दर प्रभु दासा । शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा ॥
॥ दोहा ॥
पाठ शनिश्चर देव को, की हों ‘भक्त’ तैयार ।
करत पाठ चालीस दिन, हो भवसागर पार ॥
॥इति श्री शनि चालीसा॥
शनि चालीसा पाठ के लाभ (Benefits)
- साढे़ साती और ढैया से राहत: जिन लोगों की कुंडली में शनि भारी है, उन्हें इस पाठ से मानसिक शांति और कष्टों से मुक्ति मिलती है।
- दुर्घटना से बचाव: शनि देव की कृपा से आकस्मिक दुर्घटनाओं और अकाल मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है।
- कोर्ट-कचहरी में विजय: शनि न्याय के देवता हैं, इसलिए कानूनी मामलों में फंसे लोगों को यह पाठ अवश्य करना चाहिए।
- नौकरी और व्यापार: यदि कार्यक्षेत्र में बाधाएं आ रही हों, तो शनिवार को यह पाठ करने से उन्नति होती है।
पूजा विधि (How to perform Puja)
- समय: शनिवार की शाम (सूर्यास्त के बाद)।
- स्थान: घर का पूजा स्थल या पीपल का पेड़।
- सामग्री: सरसों का तेल (Mustard Oil), काले तिल, काला कपड़ा और नीले फूल।
- विशेष: पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करें।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
शनि चालीसा का पाठ कब करना चाहिए?
शनिवार की शाम को सूर्यास्त के बाद पाठ करना सबसे उत्तम माना जाता है।
क्या घर के मंदिर में शनि देव की पूजा कर सकते हैं?
शनि देव की मूर्ति घर में नहीं रखनी चाहिए। आप घर में उनका मानसिक ध्यान करके या उनकी तस्वीर के सामने (आंखों में आंखें डाले बिना) पाठ कर सकते हैं, या मंदिर जाकर दीपक जलाएं।
शनि देव को खुश करने के लिए क्या दान करें?
काली उड़द, लोहा, काला कपड़ा, सरसों का तेल और जूते-चप्पल का दान करना बहुत शुभ होता है।
क्या महिलाएं शनि चालीसा पढ़ सकती हैं?
जी हाँ, महिलाएं भी शनि चालीसा का पाठ कर सकती हैं, लेकिन शनि देव की मूर्ति को स्पर्श नहीं करना चाहिए।




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