प्रभुपूजा | शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से 20 अक्टूबर
ओम गणेश, हर हर महादेव, जय सियाराम, जय माता दी! शारदीय नवरात्रि की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ। माँ दुर्गा आपकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करें।
नवरात्रि में अखंड दीपक जलाने को लेकर लोगों के मन में कई भ्रांतियाँ और प्रश्न रहते हैं। “आचारः प्रथमो धर्मः” कहा गया है, लेकिन यह भी ध्यान रखना ज़रूरी है कि कोई रीति कहीं कुरीति न बन जाए। इस लेख में अखंड दीपक से जुड़े सभी प्रमुख प्रश्नों के उत्तर सरल भाषा में दिए गए हैं।
1. अखंड दीपक प्रज्वलित करने का शुभ मुहूर्त
अखंड दीपक घटस्थापना के समय ही प्रज्वलित करना चाहिए। 11 अक्टूबर को घटस्थापना का समय सुबह 6:19 से 10:12 बजे के बीच है। इसी अवधि में कलश स्थापना और माता रानी की पूजा के साथ अखंड दीप भी जलाएँ।
2. घी का दीपक या तेल का?
दोनों में से कोई भी जलाया जा सकता है, परंतु:
- सर्वोत्तम: गौ माता का शुद्ध घी
- तेल का दीपक: केवल तिल के तेल का ही जलाएँ
3. अखंड दीपक किस दिशा और स्थान पर रखें?
- घी का दीपक: माता रानी के दाएँ हाथ की ओर रखें। जब आप माता के सम्मुख बैठते हैं, तब वह आपकी बाईं ओर होगा।
- तेल का दीपक: माता रानी के बाएँ हाथ की ओर रखें। आप बैठेंगे तो वह आपकी दाईं ओर होगा।
दीपक स्थापित करने की विधि: जिस स्थान पर दीपक रखना है, वहाँ चंदन या कुमकुम से चौरस (चतुरस्र) या त्रिकोण बनाएँ। उसके बीच एक छोटा बिंदु लगाएँ। उस पर थोड़े अक्षत या पुष्प-पंखुड़ियाँ रखें और उसके ऊपर दीपक स्थापित करें।
4. बाती किसकी हो: कलावा या नाड़ा?
हाथ में बाँधने वाले रक्षासूत्र (कलावा) या लहंगे/घाघरे में डाले जाने वाले नाड़े से दीपक की बाती बनाना उचित नहीं है। अपने घर के बुजुर्गों से पूछिए, पहले किसी ने कलावे या नाड़े से दीपक नहीं जलाया।
यह परंपरा सुविधा की चाह से शुरू हुई है। एक बार लंबी बाती डाल दी और दो-पाँच दिन दीपक की ओर देखना ही न पड़े। परंतु जो तप कठिन न हो, वह तप ही क्या? शास्त्र (निर्णयसिंधु, धर्मसिंधु आदि) के अनुसार बाती कपास की रुई की होनी चाहिए। इसे अपने हाथों से लंबा बनाकर दीपक प्रज्वलित करें।
5. बाती बुझने लगे तो क्या करें?
जब लगे कि बाती शांत होने वाली है और उसे ठीक करना है, तब एक अतिरिक्त दीपक जला लें। वह 5-10 मिनट तक चलता रहे, जब तक आप अखंड दीपक की बाती ठीक करते हैं। घी का अखंड दीपक है तो अतिरिक्त दीपक घी का, और तेल का है तो तेल का जलाएँ। इससे दीपक “अखंड” ही कहलाएगा और टूटेगा नहीं।
बहुत से लोगों में श्रद्धा से अधिक अंधश्रद्धा और धर्म का अभय कम, भय ज़्यादा रहता है, कि दीपक बुझ गया तो अशुभ हो जाएगा। ऐसे भय को मन में स्थान न दें।
6. खड़ी बाती या लेटी बाती?
शास्त्रों के श्लोकों में खड़ी या लेटी बाती का कोई नियम नहीं मिलता। कुछ सकाम विधानों में ज़रूर उल्लेख है। व्यावहारिक कारण यह है कि लंबी बाती अधिक दिन चलती है, क्योंकि खड़ी बाती का घी या तेल नीचे से खत्म होते ही वह शांत हो जाती है। लौ दोनों में ऊपर की ओर ही जाती है। इसलिए परंपरा के अनुसार आचरण कर सकते हैं।
7. क्या दो दीपक जला सकते हैं?
जी हाँ, एक घी का और एक तेल का दीपक साथ में जलाया जा सकता है।
- घी का दीपक: घर की नकारात्मकता दूर करने वाला माना गया है।
- तिल के तेल का दीपक: दरिद्रता दूर करने और लक्ष्मी की प्राप्ति कराने वाला माना गया है।
8. अखंड दीपक के समय पालन करने योग्य नियम
- स्वयं दीपक के पास शयन करें। जहाँ माता रानी और अखंड दीप स्थापित है, वहीं नीचे आसन (जैसे दर्भासन) बिछाकर सोएँ। अनुष्ठान में सुविधाओं का त्याग करना है।
- ज़िम्मेदारी स्वयं निभाएँ। दीपक की देखभाल कभी किसी को, कभी किसी और को न सौंपें। अनुष्ठान आप कर रहे हैं, तो यह दायित्व भी आपका है। दीपक को अधिक लोग स्पर्श न करें।
- शांत और सात्त्विक रहें। घर में क्लेश-कलह और क्रोध न करें। मांस-मदिरा और तामसिक भोजन का त्याग करें। अधिक से अधिक माँ की भक्ति करें।
बहनों और बेटियों के लिए: यदि आपको पता है कि नवरात्रि के शुरुआती दो-तीन दिनों में मासिक धर्म आ सकता है, तो अखंड दीप की स्थापना उस समय के पूर्ण होने के बाद करें, कोई चिंता नहीं। और यदि शुरुआत से दीपक जल रहा है और अंतिम दो-तीन दिनों में मासिक धर्म आ जाए, तब भी चिंता न करें। दीपक चलने दें, आप उसे स्पर्श न करें। आपका अनुष्ठान निरंतर माना जाएगा।
9. अखंड दीपक के लाभ
- “अखंड दीपकं देव्याः”, अखंड दीप माँ दुर्गा की प्रीति बढ़ाने वाला और उन्हें प्रसन्न करने वाला है। माँ प्रसन्न होती हैं तो अपने बच्चों को भी प्रसन्न रखती हैं।
- घर का क्लेश-कलह धीरे-धीरे शांत होता है और वास्तु दोष का शमन होता है।
- तेल का दीपक अलक्ष्मी का नाश करता है और लक्ष्मी की प्राप्ति कराता है।
- गौ-घृत का दीपक रोगकारक आसुरी तत्वों को धीरे-धीरे नष्ट करता है।
- शारदीय नवरात्रि की पूजा में अखंड दीप जलाने वाले पर माता रानी विशेष प्रसन्न होकर मनोकामनाएँ पूर्ण करती हैं।
दीपक की महिमा के कुछ श्लोक:
शुभं करोति कल्याणं आरोग्यं धनसंपदा। शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥
अग्निज्योती रविज्योतिः चन्द्रज्योतिस्तथैव च। उत्तमः सर्वज्योतीनां दीपोऽयं प्रतिगृह्यताम्॥
10. शास्त्र के साथ विज्ञान भी
यह केवल शास्त्र की बात नहीं है। बदलते मौसम में, जब बीमारियाँ अधिक फैलती हैं, तब माना जाता है कि अखंड दीप के प्रभाव से घर के रोगकारक बैक्टीरिया भी धीरे-धीरे कम होते हैं। इसका अनुभव आप स्वयं कर सकते हैं। पहले दिन दीपक के आसपास के स्थान में कुछ घंटों में उष्णता (गर्मी) बढ़ती महसूस होगी। दूसरे दिन पूरे स्थान में और तीसरे-चौथे दिन पूरे घर में। यह केवल गर्मी नहीं, एक कवच है जो घर की नकारात्मकता को धीरे-धीरे समाप्त करता है।
इसके अलावा कोई प्रश्न हो तो कमेंट बॉक्स में पूछें। उचित प्रश्नों का उत्तर अवश्य दिया जाएगा।
ओम गणेश। हर हर महादेव। जय माता दी!








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